एक परिचर्चा = बह्र 1121--2122 // 1121--2122 पर
किसी मंच पर एक तरही मुशायरे का अयोजन चल रहा था जिसमें मंच के सदस्य बड़े उत्साह से भाग ले रहे थे।
मुशायरे का तरही मिसरा था --*मिरी ज़िंदगी है नग़मा, मिरी ज़िंदगी तराना*--
और वज़न लिखा था --1121--2122 // 1121-2122
और नाम दिया गया था- मफ़ऊलु--फ़ाइलातुन //मफ़ऊलु--फ़ाइलातुन और बह्र का नाम लिखा गया थ
बह्र-ए-रमल मुसम्मन मश्कूल सालिम मुज़ाइफ़
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[गुस्ताख़ी मुआफ़ी के तहत --
मेरे हिसाब से वज़न का सही नाम होता -
फ़ इला तु--फ़ाइलातुन //फ़ इला तु--फ़ाइलातुन
और यह वज़्न मुसम्मन तो है, मगर *मुज़ाइफ़* नहीं है ]
यह बह्र कैसे बनती है यह आप सब जानते है--मैं आज इस पर चर्चा नहीं करुँगा।
बल्कि इस बह्र के एक दिलचस्प पहलू पर चर्चा करना चाहता हूँ
।हो सकता है मंच के बहुत से लोग वह दिलचस्प पहलू जानते है। यह परिचर्चा उन पाठकों के लिए है जो वह नहीं जानते है।
आप सभी ’तस्कीन-ए-औसत ’ के बारे में जानते होंगे। बहुत आसान अमल है
जब किसी -"एकल मुज़ाहिफ़ रुक्न में तीन मुतहर्रिक एक साथ आ जाए तो *औसत* [ बीच वाला] मुतहर्रिक साकिन हो जाता है और एक नया रुक्न बनता है। यह फ़ारसी का अमल है मगर इसके साथ एक शर्त [rider]भी है कि इस अमल से बह्र का नाम न बदल जाए[ यानी इस अमल से वह बह्र किसी दूसरे बहर में न चली जाए]
1121--2122 // 1121--2122 पर लगा कर देखते है । लग सकता है
1121-- फ़ इला तु-- में तीन मुतहर्रिक हर्फ़ [ फ़े-ऐन-लाम ] एक साथ जो आ गए
और फ़ इ लातु - वैसे भी एक मुज़ाहिफ़ रुक्न ही है [ फ़ाइलातुन की] तो लग सकता है
तो इस 1121 को 221 कर सकते है
तो उक्त बह्र की शकल हो जाएगी
221---2122 // 221--2122
अरे यह क्या हो गया ? यह बह्र तो बह्र-ए-मुज़ारे’ मुसम्मन अखरब हो गई।
बस यहीं Rider [शर्त ] सामने आ गई । तस्कीन के अमल से बह्र नहीं बदलनी चाहिए।
अत: 1121--2122 // 1121--2122 पर यह अमल नहीं किया जा सकता।
मतलब कि इस बह्र में
एक मिसरा -1121--2122 // 1121--2122
दूसरा मिसरा 221---2122 // 221--2122 में नहीं कह सकते इस आधार पर कि तस्कीन-ए-औसत का अमल किया है।
नोट- : इस मंच के असातिज़ा से दस्तबस्ता गुज़ारिश है कि अगर कुछ ग़लत बयानी हो गई हो तो निशानदिही ज़रूर फ़रमाए जिससे यह हक़ीर खुद को दुरुस्त कर सके ।]
्सादर
-आनन्द पाठक ’आनन’-
8800927181