उर्दू बह्र पर एक बातचीत [क़िस्त 131 ] : मिसरा के आख़िर में एक हर्फ़-ए-ज़ाइद [ 1+ ] के छूट पर
[यह आलेख उनके लिए भी है जो अरूज़ के बुनियादी इस्तेलाहात से वाक़िफ़ है
अरूज़ आशना हैं अरूज़ से जो जौक़-ओ-शौक़ फ़रमाते हैं .मज़ीद मालूमात
हासिल करना चाहते है, मुस्तफ़ीद होना चाहते है ]
-हमारे कुछ मित्रों की धारणा है या मान्यता है कि--किसी मिसरा के आख़िर में एक हर्फ़ बढ़ाने की छूट है --।
आज इसी पर चर्चा करेंगे।
यह धारणा अर्ध सत्य है।
अर्धसत्य इसलिए कि --किसी मिसरा के आख़िर में एक हर्फ़-ए-साकिन बढ़ाने की छूट है [ हर्फ़-ए-मुतहर्रिक नहीं]
हर्फ़-ए-मुतहर्रिक क्यों नहीं ? इस पर बाद में कभी चर्चा करेंगे
आज तो यह चर्चा करेंगे कि हर्फ़-ए-साकिन किस मिसरा के आखिर मे बढ़ा सकते हैं? मिसरा उला में कि मिसरा साकिन में ?
पिछ्ली क़िस्त में चर्चा कर चुके हैं कि यह हर्फ़-ए-साकिन शे’र के मिसरा ऊला के आख़िर में ही बढ़ा सकते है। मिसरा सानी में नहीं।
मिसरा सानी में क्यों नहीं ?
मिसरा सानी में इसलिए नहीं कि किसी ग़ज़ल की बहर मतला के मिसरा सानी से तय होती है और वही वज़न वही बह्र -पूरी गज़ल के मिसरा सानी में
क़ायम रखना होगा } कोई ख़ल्त, रद्द-ओ-बदल घटाना /बढ़ाना जायज नहीं होगा। बेबह्र होने का इमकान हो सकता है।
मिसरा उला ही ख़ाली है जहाँ एक हर्फ़-ए-साकिन बढ़ाया जा सकता है।
हाँ अलबत्ता --रुबाई और माहिया के वज़न की बात और है
रुबाई = रुबाई के किसी मिसरे के आख़िर मे एक हर्फ़-ए-साकिन बढ़ाया जा सकता है। और लोग बढ़ाते भी है।
भाई रुबाई में ऐसी क्या बात है जो ग़ज़ल में नहीं है ?
रुबाई में कोई मतला नहीं होता --मिसरा सानी नहीं होता--मिसरा उला नहीं होता। बल्कि चारो मिसरे Independent होते है ,अलग अलग होते है, अत: एक
हर्फ़-ए-साकिन किसी मिसरा के आख़िर में बढ़ाया जा सकता है/छूट है।
एक दिलचस्प बात यह भी कि इसी छूट के कारण -रुबाई के 24 वज़न दस्तयाब होती है। अगर यह छूट न हो तो रुबाई के वज़न 12 औज़ान में ही सिमट जाते।
ख़ैए। हम लोगो को इस पर ज़ियादे सोचने की ज़रूरत नही। क्योंकि हम लोग आजकल कौन सी रुबाई लिखते
माहिया = यही बात माहिया के औजान में भी लागू होती है। वहाँ भी कोई मिसरा उला . मिसरा सानी नहीं होता । तीनो मिसरे Independent होते है । अत: इस केस में भी
किसी मिसरा के आख़ीर में एक हर्फ़-ए-साकिन बढ़ाया जा सकता है/ या छूट है।
[[note -: इस मंच के असातिज़ा से दस्तबस्ता गुज़ारिश है कि अगर कुछ ग़लत बयानी हो गई हो तो निशानदिही ज़रूर फ़रमाए जिससे यह हक़ीर खुद को दुरुस्त कर सके ।
सादर
-आनन्द पाठक ’ आनन’
880092 7181
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