Tuesday, August 4, 2026

उर्दू बह्र पर एक बात चीत : क़िस्त 138 : वतद---वतद-ए-मौक़ूफ़

 चर्चा 004: वतद -- वतद-ए-मौक़ूफ़

पिछले चर्चा में मैने वतद-ए-मौक़ूफ़ की बात की थी।

[Disclaimer Caluse: यह मजमून उन अह्बाब के लिए है जों अरूज़ की बुनियादी इस्तेलाहात से वाक़िफ़ होना चाहते है।

 आप वतद [बहुवचन औदात] के बारे में जानते होंगे। उर्दू में 3-हर्फ़ी अल्फ़ाज़ को ’वतद’ कहते हैं जिसे हिंदी में हम ’त्रिकल’ कहते हैं ।हम यहाँ त्रिकल-द्विकल की चर्चा नहीं करेंगे । हिंदी की बात हिंदीं व्याकरण से--उर्दू की बात उर्दू क़वायद [ उर्दू व्याकरण] से। अगर हम ग़ज़ल की बात करते है, बह्र, अर्कान[ अफ़ाइल] की बात करते है, हर्फ़ के दबाने गिराने [पतन]की बात करते हैं ज़िहाफ़ात की बात करते हैंतो उर्दू व्याकरण ही ’फ़ालो’ करना पड़ेगा। अरूज़ की बात माननी ही पड़ेगी। यह नहीं कि अपनी सुविधानुसार कभी हिंदी, कभी उर्दू व्याकरण की बात करें।हिंदी-उर्दू व्याकरण  के इस प्रकार के ’घाल-मेल’ से एक ला-हासिल  बहस शुरु हो जाती है और पाठको को, नौ-मश्क़ शायरों के मन में भ्रम पैदा हो जाता है।

 एक बात ध्यान रखने की है-- 

-उर्दु ज़ुबान की हैय्यत [बनावट] ही ऐसी है कि उर्दू के किसी शब्द का -पहला हर्फ़ ’मुतहर्रिक’ और आख़िरी हर्फ़ ’साकिन’ होता है।

अब आप कहेंगे यह मुतहर्रिक-साकिन क्या बला है?साहिब ये बला नहीं --शब्द निर्माण की कला है। चलिए एक संक्षिप्त चर्चा मुतहर्रिक- साकिन हर्फ़ पर कर लेते हैं।

आप जानते है- उर्दू वर्णमाला [ हरूफ़-ए-तहज्जी] में जितने भी हर्फ़ होते हैं सभी मूलत: साकिन [स्वर रहित] होते है। मगर मात्र इन साकिन  हर्फ़ से शब्द नहीं बन सकते जब तक कि इन स्वर रहित हर्फ़[ साकिन] पर कोई ’हरकत’ न लगाएँ। उर्दू में मुख्यत: तीन हरकत [ ज़ेर--ज़बर-पेश] होते है और इन हरकात को लगाते ही हर्फ़ एक ख़ास आवाज़ देने लगता है। हरकत शुदा हर्फ़ को ही ’ मुतहर्रिक’ कहते हैं

जैसे अब-कमल--असर-लहर --बसर--बशर-- सबमें पहले हर्फ़  [ यानी -क -अ-ल-ब ] पर जबर- की हरकत लगी हुई है--चाहे इमला में दिखावें या न दिखावें

उसी तरह - उस-खुश -बुत --के पहले हर्फ़ पर -पेश की हरकत लगी होती है।

यह सब बेसिक बातें किसी भी उर्दू व्याकरण की या इन्टेरेनेट पर आराम से मिल जाएगी।

अब वतद पर आते है-- 3 हर्फ़ी शब्द को ’वतद’ कहते है 

मुतहर्रिक-साकिन इन 3-अदद हर्फ़  से निम्नलिखिता संभावनाएँ [इमकानात] हो सकती है

[अ]  मुतहर्रिक + मुतहर्रिक + साकिन

[ब]  मुतहर्रिक+  साकिन   + मुतहार्रिक

[स]  मुतहर्रिक + साकिन   + साकिन


यानी पहले मुक़ाम पर मुतहर्रिक और आख़िरी मुक़ाम पर साकिन लाना ही लाना है। और कोई संभावना बनती हो तो बताएँ।

[अ]  मुतहर्रिक + मुतहर्रिक + साकिन = अरूज़ियों ने इसका नाम --वतद-ए-मज्मुआ  दिया। मज्मुआ इसलिए की दो मुतहर्रिक हर्फ़

एक साथ जमा हो गए-सो मज़मुआ। और इनका वज़न हमेशा - 12- होता है

सहर--लहर--असर--रक़म--बदल--बरस- मरज--गरज़- शजर -  आदि सैकड़ों अल्फ़ाज़

और अर्कान में मफ़ा--इला--इलुन--सब वतद-ए-मज्मुआ हैं


[ब]  मुतहर्रिक+  साकिन   + मुतहार्रिक = अरूज़ियों ने इसका नाम --वतद-ए-मफ़रूक - दिया। कारण की दो मुतहारिक के बीच

फ़र्क आ गया --एक साथ नहीं है--सिलसिलेवार नही है --इसलिए मफ़रूक

उर्दू में ऐसा कोई लफ़्ज़ नहीं मिलेगा जिसके आख़िर में मुतहर्रिक हर्फ़ आता हो। ऊपर पहले ही यह बात बता दी गई है। तो इसकी ज़रूरत क्या थी ?

ज़रूरत थी --अर्कान बनाने में-

 कभी कभी इज़ाफ़त और अत्फ़ के अमल से ऐसे शब्द बन जाते हैं।

[स]  मुतहर्रिक + साकिन   + साकिन = अरूज़ियों ने  इस arrangement का नाम दिया --वतद-ए-मौक़ूफ़ । यह अर्कान बनाने के काम नही आता

यह किसी अर्कान [ अफ़ाइल ] में आता भी नहीं। ऐसे सैकड़ो अल्फ़ाज़ उर्दू में  आप को मिल जाएंगे और इनका वज़न हमेशा -21- होगा

जैसे अब्र--अक़्ल--अम्न--शह्र--ज़ह्र--चर्ख़ [आसमान] ----

 अब  कुछ और अल्फ़ाज़ वतद-ए-मजमुआ पर पेश करते है--जिसका वज़न - 12-होगा-

अबद--असर--अजल--ख़बर--खिरद--रक़म --शुतुर [ऊँट]--शिकम[पेट] --वग़ैरह वग़ैरह -एक लम्बी फ़ेहरिस्त।

 अब कुछ और अल्फ़ाज़  वतद-ए-मौक़ूफ़ का पेश करते है --जिसका वज़न हमेशा --21 --पर होगा

उर्द-अस्र-ज़ख्म -दर्द-जुर्म--हर्फ़--ख़ुश्क--जिस्म-हर्ब-ज़ुह्द-- वग़ैरह वग़ैर्ग --एक लम्बी फ़ेहरिस्त

उर्दू शब्दों का सही वज़न निकालने के लिए -सही तलफ़्फ़ुज़ जानना ज़रूरी है और इसमे कोई मुस्तनद लुग़त [ उर्दू का प्रामाणिक शब्दकोश] आप की मदद कर सकता है।

अगर आप को हर्फ़ के हरकत -साकिन का आइडिया हो गया तो शब्द का वज़न [ मात्रा भार] ब आसानी निकाला जा सकता है।

आप की मदद कर सकता है।

अब मरजी आप की--कि 

शह्र को शहर कहें 

ज़ह्र को ज़हर कहें

बह्र को बहर कहें

अक़्ल को --अकल कहें

या फिर 

मरज को मर्ज कहते है

गरज को गर्ज कहते है 

या नज़र को नज़्र कहते है --अरे हाँ इसे कह सकते है 😀😀

नज़र[12] निगाह

नज़्र [21] भेंट 

आप कोशिश करेंगे तो बहुत से शब्द मिल जाएँगे। आप चाहें तो ऐसी सूची आप खुद बना सकते हैं--फिर तो आप को पूछने की ज़रूरत ही न पड़ेगी

कि फ़लाना शब्द का वज़्न क्या होगा ?

सादर

-आनन्द पाठक ’आनन’-

880092 7181